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 मोदी की कविता  मां.. मुझे कुछ भी मांगना नहीं है       मां.. यह याचना नहीं, मुझे कुछ भी मांगना नहीं है। मुझे तो इस जगत को जोड़ने वाली अप्रतिम प्रेम-सृष्टि 'स्व' के साथ नहीं त्वम के साथ सर्जन पाती है त्वम के साथ ही विलीन हो जाती है और इसीलिए  प्राप्त करना है ये भाव-जगत। मां.. मुझे शंका-कुशंका आशा-निराशा भय-चिंता सफलता-असफलता, पाना या खो देना आदि सर्व भावों से मुक्त कर । मां.. मुक्त कर । (साक्षी भाव से) नरेंद्र मोदी