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 ब्रेड मत खाओ.. कैंसर हो जाएंगे ! अगर आप सुबह-सुबह नाश्ते में या फिर किसी और समय ब्रेड खाने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए.. जिस ब्रेड को आप जीने के लिए खआ रहे हैं वही आपकी जिंदगी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.. ब्रेड खाने से आप कैंसर के शिकार हो सकते हैं... CSE की रिपोर्ट से जो खुलासे हुए हैं वो बेहद हैरान करने वाले हैं.. CSE की एक रिसर्च में इस बात का पता चला है कि ब्रेड में खतरनाक रसायन हैं.. CSE ने कई बड़े और ब्रैंडेड कंपनियों के बेकरी उत्पाद पर रिसर्च किया.. इस रिसर्च में सीएसई को जो केमिकल मिला है उनमें से एक है पोटैशियम ब्रोमाइड.. हवा के साथ गर्मी ज्यादा होने पर पोटैशियम ब्रोमाइड क्रिया करता है.. यूं तो इस केमिकल का इस्तेमाल आटे को ठीक से गूंथने और उसे बेकिंग के समय ज्यादा फूलने के लिए मिलाया जाता है.. इस केमिकल को सही आंच और सही समय तक पकाया जाता है तब ये खाद्य उत्पाद से पूरी तरह से खत्म हो जाता है.. लेकिन अगर कोई सामान जल्दी-जल्दी में कम पकाया गया तो उसमें केमिकल के छूटने का भी खतरा रहता है.. ऐसे में पोटैशियम ब्रोमाइड केमिकल का खाद्य पदार्थ के साथ शरीर में जाने का खतर...
पेरिस पर आतंकी हमला -  सीरिया पर हमले का जवाब ? दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों में शुमार पेरिस उस वक्त बदरंग हो गया जब पेरिस के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ.. इस आतंकी हमले क निशाने पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद भी थे.. हालांकि वो इस कायराना हमले में बच गए..लेकिन अपने सैंकड़ो नागरिकों को वो नहीं बचा पाए.. "  मैंने उनकी बातों को ध्यान से सुना.. वो कह रहे थे.. ये ओलांद की गलती है.. ये तुम्हारे राष्ट्रपति की गलती है.. उन्हें सीरिया के मामले में दखल नहीं देना चाहिए था.. वो इराक के बारे में भी कह रहे थे" तो क्या ये हमला वाकई सीरिया और इराक में is आतंकियों पर हुए हमले के खिलाफ में किया गया .. तो क्या is के आतंकियों ने फ्रांस की सरकार से सीरिया में हुए हमलों का बदला लिया है.. ISIS ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेकर फ्रांस सरकार को खुला चैलेंज किया है.. ISIS के चंद आतंकियों ने पूरे शहर के अमन चैन को बर्बाद कर दिया और मौत का ऐसा खेल खेला जिससे पूरी दुनिया हैरान रह गई.. ISIS ने ये साफ कर दिया है कि ये सीरिया पर फ्रांस द्वारा किए गए हमले का जवाब है.. दरअसल इस साल फ्र...

हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे.......

हमें आगे बढ़ना होगा... आज भले ही हम इक्कसवीं शताब्दी में जी रहे हों मगर हमारी ज़मीनी हकीक़त कुछ और ही है । आज भी इस देश की इक्कीस प्रतीशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जी रही है । जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग मध्य वर्ग इसी संतोष में जी रहा है की आज नही तो कल उसका सपना जरुर पूरा होगा । हाँ, यह बात जरुर है की आर्थिक उदारीकरण ने इनके सपनो को कुछ हद तक पूरा भी किया है । मगर मंजिल अभी बहुत दूर है । बिहार की बाढ़ में लाखों बह गए । कौन है जिम्मेदार ? आतंकवाद के भेंट हजारों चढ़ गए । कौन है जिम्मेदार ? आज़ादी के साठ साल पूरे हो चुके हैं । नेता, नौकरशाह अमीर हो गए , स्विस बैंक में देश का अरबों रुपयें जमा है । परन्तु देश क़र्ज़ में डूबा है, हम तीसरी दुनिया के लोग कहलाते हैं । कौन है जिम्मेदार ? कहीं हम तो नही ? ज़रा सोचिए! इसलिए मैं कहता हूँ........ हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे पग-पग पर हैं काटें उनको फूल बनाना होगा हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे । चाहे सूनामी आए या आए भूकंप कहीं पर लड़ना होगा इससे हमको जितना होगा इसको हमें आगे बढ़...

भारत की जनता.....

भारत की जनता बहुत पहले एक कविता भारतीय जनता की स्थितियों को लेकर लिखा था.... एक ऐसी जनता जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र में रहती है, जिसे अपना सरकार चुनने की छूट है, जो अपने देश के भाग्यविधाताओं के किस्मत का फैसला अपना मत देकर करती है, बड़ी ही गरीबी, लाचारी, और तंगहाली में जिंदा रहती है । इस देश की बड़ी संख्या आज भी अभावों में जी रही है । उसे कोई फर्क नही पड़ता की प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ क्या डील करते हैं ? उसे मतलब है की किसी तरह उसे पेट भर भोजन मिल जाय। देश में सूचना क्रांति आए या फिर यह देश परमाणु शक्ति से संपन्न हो जाय, उसे कोई फर्क नही पड़ता । मगर धीरे- धीरे ही सही वह जनता अब जागने लगी है । तभी तो इस बार बाहूबलियों और बेईमानों को नानी याद आ गई और संसद से महरुम होना पड़ा । यह है भारत की जनता भूखी नंगी है यह बेबस - लाचार है खोई -खोई है यह सोई - सोई सी है । क्या कहूँ मै तुमसे , कि कैसी है यह ? ख़ुद पर रोती है यह फिर भी जीती है यह । ताकत इनके है पास फिर भी है आभाव इनकी है यह कहानी गरीबी निशानी । बढ़ती संख्या की बोझ अधूरी शिक्षा की सोच लिए चलते हैं यह फिर भी आगे...