सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शरीफ ने कितनी शराफत दिखाई ?


आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए पाक की जमीन का एक बार और इस्तेमाल होने के सबूतों के बाद पाकिस्तान घिर गया है.. अमेरिका ने भी इस मामले में पाकिस्तान से बात की है और आतंकियों को रोकने और उन्हें पर्दाफाश करने को कहा है.. इस हमले को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बात की है..

पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने भी पाकिस्तान पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है.. हमले की तेजी से जांच के लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवजा शरीफ से बात की है.. और हमले के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने को कहा है..
इस बातचीत के बाद नवाज शरीफ ने जॉन केरी को आश्वासन दिया है कि मामले की जांच जारी है और सच जल्दी ही सामने आ जाएगा.. नवाज शरीफ ने एक बयान जारी कर कहा "पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले के मामले में पाकिस्तान पारदर्शी तरीका अख्तियार करते हुए बेहद तेजी से जांच कर रहा है..  पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्‍तेमाल किसी और देश पर आतंकी हमले के लिए किसी कीमत पर करने नहीं देगा.. दुनिया इस संबंध में हमारी प्रभावशीलता और गंभीरता को देखेगी"


अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी इस हमले की जांच में पाकिस्तान को पूरा सहयोग देने की बात कही है.. जानकार भी मानते हैं कि इस तरह के आतंकी वारदातों पर पाकिस्तान के ऊपर दवाब बनना चाहिए.. और जल्दी से जल्दी कार्रवाई होना चाहिए ..

डेडलाइन खत्म...  रिजल्ट कब ?

पाकिस्तान में चंद लोगों की सिरपरस्ती में आतंकी संगठन भारत के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं.. आतंक की आग को भड़काकर देश के लहूलुहान करने के फिराक में रहते हैं.. लंबे समय से ये संगठन पाकिस्तान में पल बढ़ रहे हैं.. भारत ने आतंकियों पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को डेडलाइन दी थी अब वो डेडलाइन भी खत्म हो गई है..

आपको बता दें कि पाकिस्तान ने हमले से जुड़े सबूतों के मिलने के बाद पीएम नवाज शरीफ ने आईबी चीफ को हमले की जांच के आदेश दिए हैं.. लेकिन जांच के बाद अबतक कोई कार्रवाई होते नहीं दिख रही है.. अब भी हालात जस के तस हैं और भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकी और उनके आका खुले हवा में सांस ले रहे हैं..

पांच दिन बाद इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव की वार्ता होनी है.. पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज ने अच्छे माहौल में वार्ता की उम्मीद जताई है.. और कहा है कि वार्ता अपने तय वक्त पर होगी.. उन्होंने ये भी कहा कि भारत से मिले सबूतों पर पाकिस्तान कार्रवाई करेगा.. लेकिन इन बयानों के बाद भी सवाल बरकरार हैं.. भारत के कड़े रूख के बाद पाकिस्तान ने इस बात का भरोसा दिया है कि आतंकियों पर कार्रवाई की जाएगी.. लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये कार्रवाई कब होगी..  15 जनवरी को भारत-पाकिस्तान के बीच विदे सचिव स्तर की वार्ता होनी है.. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो असर वार्ता पर भी पड़ेगा

एयरबेस पर हमले के बाद से पाकिस्तान बैकफुट पर है.. वहां की सरजमीं पर आतंकी खुलाआम घूम रहे हैं और वारदात को अंजाम दे रहे हैं.. बावजूद इसके पाकिस्तान कार्रवाई करने की जगह सबूत मांग रहा है.. उम्मीद की जा रही है कि इस बार पारकिस्तान इस  मामले पर गंभीर रूख अपनाएगा और आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भारत की जनता.....

भारत की जनता बहुत पहले एक कविता भारतीय जनता की स्थितियों को लेकर लिखा था.... एक ऐसी जनता जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र में रहती है, जिसे अपना सरकार चुनने की छूट है, जो अपने देश के भाग्यविधाताओं के किस्मत का फैसला अपना मत देकर करती है, बड़ी ही गरीबी, लाचारी, और तंगहाली में जिंदा रहती है । इस देश की बड़ी संख्या आज भी अभावों में जी रही है । उसे कोई फर्क नही पड़ता की प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ क्या डील करते हैं ? उसे मतलब है की किसी तरह उसे पेट भर भोजन मिल जाय। देश में सूचना क्रांति आए या फिर यह देश परमाणु शक्ति से संपन्न हो जाय, उसे कोई फर्क नही पड़ता । मगर धीरे- धीरे ही सही वह जनता अब जागने लगी है । तभी तो इस बार बाहूबलियों और बेईमानों को नानी याद आ गई और संसद से महरुम होना पड़ा । यह है भारत की जनता भूखी नंगी है यह बेबस - लाचार है खोई -खोई है यह सोई - सोई सी है । क्या कहूँ मै तुमसे , कि कैसी है यह ? ख़ुद पर रोती है यह फिर भी जीती है यह । ताकत इनके है पास फिर भी है आभाव इनकी है यह कहानी गरीबी निशानी । बढ़ती संख्या की बोझ अधूरी शिक्षा की सोच लिए चलते हैं यह फिर भी आगे...

धूमिल की कविता "मोचीराम "

मोचीराम की चंद पंक्तियाँ राँपी से उठी हुई आँखों ने मुझेक्षण-भर टटोला और फिर जैसे पतियाये हुये स्वर में वह हँसते हुये बोला- बाबूजी सच कहूँ-मेरी निगाह में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है मेरे लिये, हर आदमी एक जोड़ी जूता है जो मेरे सामने मरम्मत के लिये खड़ा है। और असल बात तो यह है कि वह चाहे जो है जैसा है, जहाँ कहीं है आजकल कोई आदमी जूते की नाप से बाहर नहीं है, फिर भी मुझे ख्याल रहता है कि पेशेवर हाथों और फटे जूतों के बीच कहीं न कहीं एक आदमी है जिस पर टाँके पड़ते हैं, जो जूते से झाँकती हुई अँगुली की चोट छाती पर हथौड़े की तरह सहता है। यहाँ तरह-तरह के जूते आते हैंऔर आदमी की अलग-अलग ‘नवैयत’बतलाते हैं सबकी अपनी-अपनी शक्ल हैअपनी-अपनी शैली है मसलन एक जूता है:जूता क्या है-चकतियों की थैली है इसे एक आदमी पहनता है जिसे चेचक ने चुग लिया है उस पर उम्मीद को तरह देती हुई हँसी है जैसे ‘टेलीफ़ून ‘ के खम्भे परकोई पतंग फँसी है और खड़खड़ा रही है। ‘बाबूजी! इस पर पैसा क्यों फूँकते हो? ’मैं कहना चाहता हूँ मगर मेरी आवाज़ लड़खड़ा रही है मैं महसूस करता हूँ- भीतर सेएक आवाज़ आती ह...

हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे.......

हमें आगे बढ़ना होगा... आज भले ही हम इक्कसवीं शताब्दी में जी रहे हों मगर हमारी ज़मीनी हकीक़त कुछ और ही है । आज भी इस देश की इक्कीस प्रतीशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जी रही है । जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग मध्य वर्ग इसी संतोष में जी रहा है की आज नही तो कल उसका सपना जरुर पूरा होगा । हाँ, यह बात जरुर है की आर्थिक उदारीकरण ने इनके सपनो को कुछ हद तक पूरा भी किया है । मगर मंजिल अभी बहुत दूर है । बिहार की बाढ़ में लाखों बह गए । कौन है जिम्मेदार ? आतंकवाद के भेंट हजारों चढ़ गए । कौन है जिम्मेदार ? आज़ादी के साठ साल पूरे हो चुके हैं । नेता, नौकरशाह अमीर हो गए , स्विस बैंक में देश का अरबों रुपयें जमा है । परन्तु देश क़र्ज़ में डूबा है, हम तीसरी दुनिया के लोग कहलाते हैं । कौन है जिम्मेदार ? कहीं हम तो नही ? ज़रा सोचिए! इसलिए मैं कहता हूँ........ हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे पग-पग पर हैं काटें उनको फूल बनाना होगा हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे । चाहे सूनामी आए या आए भूकंप कहीं पर लड़ना होगा इससे हमको जितना होगा इसको हमें आगे बढ़...