सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सलमान पर आर्म्स एक्ट का मुकदमा 

 

सलमान खान पर आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का है आरोप....सलमान पर दो ब्लैकबक्स के शिकार करने का आरोप है....सलमान पर बिना लाइसेंस के हथियार रखने का आरोप है....
और इन सारे आरोपों की दलील पर आज राजस्थान के जोधपुर की कोर्ट में सलमान ख़ान की पेशी है....इन मामलों पर आज फैसला आना है.. 16 साल पहले 1998 के इस मामले में सलमान समेत 16 गवाहों के बयान दर्ज किये गये हैं..

क्या है ये मामला ?

1998 में फिल्म हम साथ-साथ है की शूटिंग के दौरान सलमान के खिलाफ जोधपुर के लूणी थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया गया था.. आरोप था कि सलमान खान ने 1-2 अक्टूबर की रात कांकाणी इलाके में काले हिरणों का शिकार किया था.. बाद में जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि शिकार के लिए .32 बोर के रिवॉल्वर और .22 बोर के राइफल का प्रयोग किया गया था.. साथ ही दोनों हथियारों के लाइसेंस की समय सीमा खत्म हो चुकी थी ..यानि हथियारों का लाइसेंस रिन्यू नहीं किया गया था.. इस कारण सलमान पर आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया गया था..  सलमान खान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 और 27 के तहत मामला दर्ज किया गया है..दोनों ही धाराओं में सजा का प्रावधान है.. धारा 25 में 1 से 3 साल तक की सजा हो सकती है.. जबकि  धारा 27 के तहत 3 से 7 साल तक सजा का प्रावधान है
काले हिरण शिकार केस में सलमान खान पर कुल चार मामले चल रहे हैं.. जिसमें से दो मामले में फैसला आ चुका है.. एक मामले में निचली अदालत ने सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाई थी.. हालांकि इस सजा पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी... लेकिन बाद में सुप्रीम कोसुप्र्ट ने इस पर दखल से इनकार करते हुए निचली अदालत को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया था..

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भारत की जनता.....

भारत की जनता बहुत पहले एक कविता भारतीय जनता की स्थितियों को लेकर लिखा था.... एक ऐसी जनता जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र में रहती है, जिसे अपना सरकार चुनने की छूट है, जो अपने देश के भाग्यविधाताओं के किस्मत का फैसला अपना मत देकर करती है, बड़ी ही गरीबी, लाचारी, और तंगहाली में जिंदा रहती है । इस देश की बड़ी संख्या आज भी अभावों में जी रही है । उसे कोई फर्क नही पड़ता की प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ क्या डील करते हैं ? उसे मतलब है की किसी तरह उसे पेट भर भोजन मिल जाय। देश में सूचना क्रांति आए या फिर यह देश परमाणु शक्ति से संपन्न हो जाय, उसे कोई फर्क नही पड़ता । मगर धीरे- धीरे ही सही वह जनता अब जागने लगी है । तभी तो इस बार बाहूबलियों और बेईमानों को नानी याद आ गई और संसद से महरुम होना पड़ा । यह है भारत की जनता भूखी नंगी है यह बेबस - लाचार है खोई -खोई है यह सोई - सोई सी है । क्या कहूँ मै तुमसे , कि कैसी है यह ? ख़ुद पर रोती है यह फिर भी जीती है यह । ताकत इनके है पास फिर भी है आभाव इनकी है यह कहानी गरीबी निशानी । बढ़ती संख्या की बोझ अधूरी शिक्षा की सोच लिए चलते हैं यह फिर भी आगे...

धूमिल की कविता "मोचीराम "

मोचीराम की चंद पंक्तियाँ राँपी से उठी हुई आँखों ने मुझेक्षण-भर टटोला और फिर जैसे पतियाये हुये स्वर में वह हँसते हुये बोला- बाबूजी सच कहूँ-मेरी निगाह में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है मेरे लिये, हर आदमी एक जोड़ी जूता है जो मेरे सामने मरम्मत के लिये खड़ा है। और असल बात तो यह है कि वह चाहे जो है जैसा है, जहाँ कहीं है आजकल कोई आदमी जूते की नाप से बाहर नहीं है, फिर भी मुझे ख्याल रहता है कि पेशेवर हाथों और फटे जूतों के बीच कहीं न कहीं एक आदमी है जिस पर टाँके पड़ते हैं, जो जूते से झाँकती हुई अँगुली की चोट छाती पर हथौड़े की तरह सहता है। यहाँ तरह-तरह के जूते आते हैंऔर आदमी की अलग-अलग ‘नवैयत’बतलाते हैं सबकी अपनी-अपनी शक्ल हैअपनी-अपनी शैली है मसलन एक जूता है:जूता क्या है-चकतियों की थैली है इसे एक आदमी पहनता है जिसे चेचक ने चुग लिया है उस पर उम्मीद को तरह देती हुई हँसी है जैसे ‘टेलीफ़ून ‘ के खम्भे परकोई पतंग फँसी है और खड़खड़ा रही है। ‘बाबूजी! इस पर पैसा क्यों फूँकते हो? ’मैं कहना चाहता हूँ मगर मेरी आवाज़ लड़खड़ा रही है मैं महसूस करता हूँ- भीतर सेएक आवाज़ आती ह...

हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे.......

हमें आगे बढ़ना होगा... आज भले ही हम इक्कसवीं शताब्दी में जी रहे हों मगर हमारी ज़मीनी हकीक़त कुछ और ही है । आज भी इस देश की इक्कीस प्रतीशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जी रही है । जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग मध्य वर्ग इसी संतोष में जी रहा है की आज नही तो कल उसका सपना जरुर पूरा होगा । हाँ, यह बात जरुर है की आर्थिक उदारीकरण ने इनके सपनो को कुछ हद तक पूरा भी किया है । मगर मंजिल अभी बहुत दूर है । बिहार की बाढ़ में लाखों बह गए । कौन है जिम्मेदार ? आतंकवाद के भेंट हजारों चढ़ गए । कौन है जिम्मेदार ? आज़ादी के साठ साल पूरे हो चुके हैं । नेता, नौकरशाह अमीर हो गए , स्विस बैंक में देश का अरबों रुपयें जमा है । परन्तु देश क़र्ज़ में डूबा है, हम तीसरी दुनिया के लोग कहलाते हैं । कौन है जिम्मेदार ? कहीं हम तो नही ? ज़रा सोचिए! इसलिए मैं कहता हूँ........ हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे पग-पग पर हैं काटें उनको फूल बनाना होगा हमें आगे बढ़ना होगा , बढ़ना होगा आगे । चाहे सूनामी आए या आए भूकंप कहीं पर लड़ना होगा इससे हमको जितना होगा इसको हमें आगे बढ़...